श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 9 : Shalyaparva • अध्याय 43MLyHtxktFaVBwEer8Y
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समन्तपञ्चक के पावन क्षेत्र में भीमसेन और दुर्योधन के मध्य गदायुद्ध अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया था। दुर्योधन के अद्वितीय पैंतरों और चपलता के कारण भीमसेन का कोई भी वार सफल नहीं हो पा रहा था। उस संकटपूर्ण स्थिति में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन की ओर देखा। अर्जुन ने श्रीकृष्ण का संकेत समझकर भीमसेन के देखते-देखते अपनी बाईं जंघा को अपनी हथेली से थपथपाया, जिससे भीमसेन को द्युतसभा की वह भीषण प्रतिज्ञा स्मरण हो आई।
