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पौराणिक कथाएँ 6
पौराणिक कथाएँ 6
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 6 • कथा L3sUCQ3hsSMhSI8zgXwO
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समय… समय अत्यंत बलवान होता है। वह शिखंडी से भीष्म को परास्त करा सकता है, कर्ण के अजेय रथ को भूमि में फँसा सकता है, द्रौपदी का चीरहरण करा सकता है। यदि किसी से भय करना हो—तो वह समय है। महाभारत में एक अद्भुत प्रसंग आता है। अज्ञातवास के समय धर्मराज युधिष्ठिर विराट के दरबार में उपस्थित होकर कहते हैं— “हे राजन! मैं व्याघ्रपाद गोत्र में उत्पन्न हुआ हूँ। मेरा नाम कंक है। मैं द्यूत विद्या में निपुण हूँ और आपकी सेवा की अभिलाषा लेकर आया हूँ। ” द्यूत… जुआ… वही खेल, जिसमें धर्मराज ने कभी अपना सर्वस्व गंवा दिया था। आज वही युधिष्ठिर ‘कंक’ बनकर राजा विराट को वही विद्या सिखा रहे थे। जिस बाहुबली के लिए रसोइये दिन–रात भोजन परोसते थे, वही भीम अब बल्लभ बनकर स्वयं रसोई में पकवान बनाने लगा। नकुल और सहदेव पशुओं की देखरेख करने लगे। दासियों से घिरी रहने वाली महारानी द्रौपदी स्वयं एक दासी—सैरंध्री—बनकर सेवा में लग गईं।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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