कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 6 • कथा WaI7bABEyveuBJlABpDK
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एक प्रसिद्ध लोककथा के अनुसार, गोस्वामी तुलसीदास जी जब हनुमान चालीसा की रचना कर रहे थे, तब वे प्रतिदिन जो चौपाइयाँ लिखते, उन्हें रात्रि में बहुत संभालकर रख देते थे। परंतु जब प्रातःकाल उठकर देखते, तो आश्चर्यचकित रह जाते—रात में लिखी गई कुछ पंक्तियाँ मिट चुकी होती थीं। यह घटना कई दिनों तक होती रही। तुलसीदास जी अत्यंत व्याकुल हो उठे। उन्हें लगा कि अवश्य ही यह कोई दैवी संकेत है। तब उन्होंने पूर्ण श्रद्धा और भाव से श्री हनुमान जी की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर पवनपुत्र हनुमान जी साक्षात प्रकट हुए। तुलसीदास जी ने विनम्रता से कहा— “हे प्रभु! मैं आपकी महिमा का गान लिखता हूँ, किंतु रात्रि में कोई उसे मिटा देता है। यह रहस्य क्या है? ” हनुमान जी मुस्कराए और बोले—
