एक बार एक निपट कंजूस सेठ था .वह एक दमड़ी भी किसी को देने को तैयार नहीं होता .यहां तक कि वह अपनी सांसे भी सोच समझ कर लेता है .उसका अपनी सांसो को नियंत्रण करने का बड़ा अनुभव होता है . कंजूस सेठ दानचंद श्रीकृष्ण का बड़ा भक्त था ,एक बार वह स्नान करने के लिए गंगा घाट जाता है ,वहां पर श्रीकृष्ण उसकी परीक्षा लेने के लिए प्रकट हो जाते हैं. जब वह गंगा जी में डुबकी लगाने के लिए अंदर जाता है तो एकदम श्रीकृष्ण जी उसके सामने एक पंडित के रूप लेकर प्रकट हो जाते हैं ,और कहते हैं यजमान मुझे कुछ दक्षिणा दे दो .कंजूस सेठ दानचंद कहता है कि "श्रीमान मेरे पास कोई पैसा नहीं है." भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं ,"कोई बात नहीं तुम संकल्प कर लो कि मुझे कुछ दक्षिणा दोगे ".वह सोचता है चलो ठीक है और वह पंडित को 1 आना देने का निश्चय करता है और सोचता है कि पंडित को कौन सा मेरा घर पता है .मैंने तो यही संकल्प किया है, जब वह अगली बार मेरे सामने आएगा तो मैं उसे एक आने दे दूंगा.
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 6 • कथा dFuBsC3oHPi3efhCzbfi
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