कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 6 • कथा qgKREw0h7x89DVaJ7T0G
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एक बार संत रविदास जी अपनी छोटी सी दुकान में बैठकर जूते बना रहे थे। वे अपने काम में बहुत मग्न थे और उसे ही पूजा मानते थे। तभी वहाँ से एक पंडित जी (ब्राह्मण) गुजरे जो गंगा स्नान (गंगा नहाने) के लिए जा रहे थे। पंडित जी ने रविदास जी से पूछा, "अरे भाई, तुम भी चलो गंगा स्नान करने, बहुत पुण्य मिलेगा। " रविदास जी ने विनम्रता से कहा, "पंडित जी, मेरा मन तो बहुत है, लेकिन मैंने एक ग्राहक को आज ही जूते देने का वादा किया है। अगर मैं गंगा नहाने गया, तो मेरा वचन टूट जाएगा और मेरा काम अधूरा रह जाएगा। मेरे लिए मेरा कर्म ही धर्म है।
