कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 45 • कथा VYIkQ9Nk16oqILaJmjUY
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नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप माँ कुष्माण्डा की उपासना की जाती है। अपनी मंद, हल्की हंसी (कुत्सित कुष्मा) द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम 'कुष्माण्डा' पड़ा। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, चारों ओर केवल अंधकार ही अंधकार व्याप्त था, तब इन देवी ने ही अपने 'ईषत' (मंद) हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा और आदिशक्ति कहा जाता है। माँ कुष्माण्डा की कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार:
