कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 22 • कथा 1aAUqPLI0xChVwys5XtA
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मेवाड़ की राजकुमारी अजबा कुंवरी और श्रीनाथजी की यह कथा केवल एक भक्त की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अटूट विश्वास का प्रमाण है जिसने श्रीनाथजी को ब्रज (उत्तर प्रदेश) से राजस्थान के नाथद्वारा तक की यात्रा करने पर मजबूर कर दिया। अजबा कुंवरी और श्रीनाथजी: "वचन की लाज" अजबा कुंवरी मेवाड़ के सिहाड़ गाँव (जो अब नाथद्वारा है) की रहने वाली थीं। वे श्रीनाथजी की परम भक्त थीं। वे हर साल गोवर्धन पर्वत (ब्रज) की यात्रा करती थीं ताकि अपने आराध्य 'श्रीजी' के दर्शन कर सकें। लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ने लगी, उनके लिए राजस्थान से ब्रज की कठिन यात्रा करना असंभव होने लगा। अजबा कुंवरी दिन-रात रोती रहती थीं। वे श्रीनाथजी के विरह में भोजन-पानी त्यागने लगीं। उनका भाव था— "प्रभु, यदि मैं आपके पास नहीं आ सकती, तो क्या आप मेरे पास नहीं आ सकते?
