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पौराणिक कथाएँ 22
पौराणिक कथाएँ 22
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 22 • कथा 22htAXx5jm92DUq1YwCZ
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विठ्ठलनाथ जी (गुसाईंजी) ठाकुर जी के प्रति वात्सल्य भाव रखते थे। वह ठाकुर जी को अपना पुत्र मानते थे। वह वल्लभसंप्रदाय के प्रवर्तक श्री वल्लभाचार्य जी के द्वितीय पुत्र थे। एक बार विठ्ठलनाथ जी श्रीनाथ जी को दूध पिला रहे थे ठाकुर जी ने एक घूँट दूध पीया और कटोरा हटा दिया। . उन्होंने पूछा क्या हुआ, तो ठाकुर जी ने कहा आपने बहुत मिश्री डाल दी और दूध बहुत मीठा हो गया है, मुझसे ये पिया नहीं जा रहा। . विठ्ठलनाथ जी ने एक पिता के समान कहा, कोई बात नहीं, आज इसे ऐसे ही पी लो। ठाकुर जी ने मुँह बनाते हुए दूध पी लिया। . अगली बार विठ्ठलनाथ जी ने दूध में कम मिश्री मिलाई। ठाकुर जी ने एक घूँट पीया और कटोरा नीचे रख दिया। विठ्ठलनाथ जी द्वारा पूछने पर ठाकुर जी ने कहा कि आज तो दूध फीका है। . विट्ठलनाथ जी ने कहा फिर भी ऐसे ही पी लो। उन्होंने ठाकुर जी को बहुत दुलार किया और ठाकुर जी ने दूध पी लिया। . अगली बार विठ्ठलनाथ जी ने दूध और मिश्री अलग-अलग ठाकुर जी को दी और बोला आप खुद ही जितनी मिश्री चाहिए उतनी मिला लीजिए। . ठाकुर जी ने कहा आपने ऐसा क्यों किया? . विठ्ठलनाथ जी ने कहा मेरे द्वारा मिलाई हुई मिश्री आपको पसंद नहीं आती, आज ख़ुद ही मिला लो। . ठाकुर जी ने कहा मैं तो आपका बालक हूँ, और बालक को मिलाना थोड़ी आता है, और दौड़कर विठ्ठलनाथ जी की छाती से लिपट गए। . ठाकुर जी ने पूछा आप मुझसे नाराज़ हो गए क्या? आप ही मुझे मिश्री घोल कर दूध पिलाओ, मैं तो आपका बालक हूँ ना। विठ्ठलनाथ जी के आँसू निकलने लगे। . एक दिन विठ्ठलनाथ जी ने ठाकुर जी को सुलाने के लिए उनकी शैया और बिछौना तैयार किया। . ठाकुर जी ने कहा ये शैया ठीक नहीं है। विठ्ठलनाथ जी दूसरी शैया ले आये। . फिर ठाकुर जी ने कहा ये बिछौना ठीक नहीं है। विट्ठलनाथ जी दूसरा बिछौना ले आये। ठाकुर जी ने कहा ये रंग मुझे पसंद नहीं है। . विट्ठलनाथ जी दूसरे रंग का बिछौना ले आये। ठाकुर जी बार-बार अलग-अलग बहाने बनाकर सोने से मना करने लगे। गुसाईंजी पसीना-पसीना हो गये। उन्होंने कहा आपको कौनसी शैया और बिछौना पसन्द आएगा। . ठाकुर जी ने कहा मैं आपकी गोद में सोऊँगा। गुसाईंजी ने उन्हें हृदय से लगा लिया और फिर ठाकुर जी उनकी गोद में सोये। . एक बार गिरिराज गोवर्धन जी से एक बंदर आया और उसने आकर ठाकुर जी को डरा दिया।

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