कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 22 • कथा JavO6ruZ2dOhVCerkiSi
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एक समय श्री सूरदास जी ने कृष्णदास जी को कहा, कि तुमने जितने भी कीर्तन की रचना की है, उन सभी पद और कीर्तन में मेरी छाप आती है ये सुनकर कृष्णदास जी ने कहा कि अबकि मैं ऐसा पद और कीर्तन की रचना करूंगा जिसमें आप की छाप ना हो ऐसा सोचकर कृष्णदास जी एकांत मे बैठकर एकचित्त होकर पद की रचना करने बैठ गये, और सोचने लगे कि ऐसी कौनसी लीला है जिस पर सूरदासजी ने कोई पद नही गायो है, सूरदासजी ने दान, मान और गायन सभी का वर्णन सूरदासजी ने अपने पदो में कर लिया है और गाया है।
