कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 22 • कथा OgG9tD25g9XaflLYaVTc
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महाकवि कालिदास की यह कथा भारतीय साहित्य और अध्यात्म की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है। उज्जैन की माँ गढ़कालिका और कालिदास का यह संबंध केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि अटूट प्राचीन काल में राजकुमारी विद्योत्तमा अपनी विद्वत्ता के लिए प्रसिद्ध थीं। उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि जो उन्हें 'शास्त्रार्थ' (बहस) में हरा देगा, वे उसी से विवाह करेंगी। कई बड़े पंडित हार गए और अपमानित महसूस करने लगे। बदला लेने के लिए, उन्होंने किसी 'परम मूर्ख' की तलाश की। उन्हें एक व्यक्ति मिला जो उसी डाल को काट रहा था जिस पर वह बैठा था। पंडितों ने उसे सजा-धजा कर राजदरबार में पेश किया और कहा कि यह हमारे गुरु हैं, जो 'मौन व्रत' पर हैं और केवल संकेतों में बात करेंगे।
