एक’ सेठ जी “कृष्ण” जी के भक्त थे। निरंतर उनका जाप करते थे। वो रोज स्वादिष्ट पकवान बना कर कृष्ण जी के मंदिर के लिए निकलते थे, पर रास्तें में ही उसे नींद आ जाती और उसके पकवान चोरी हो जाते। वह बहुत दुखी होता और कान्हा से शिकायत करते हुये कहता, हे.. कान्हा, ऐसा क्यूँ होता हैं.. मैं आपको भोग क्यों नही लगा पाता हूँ। कान्हा कहते है.. वत्स! दानें-दानें पे लिखा हैं खाने वाले का नाम, वो मेरे नसीब में नही हैं, इसलिए मुझ तक नही पहुंचता। सेठ थोड़ा गुस्सें से कहता हैं.. ऐसा नही हैं, प्रभु कल मैं आपको भोग लगाकर ही रहूंगा आप देख लेना, और सेठ चला जाता हैं… दूसरे दिन सेठ सुबह-सुबह जल्दी नहा धोकर तैयार हो जाता हैं, और अपनी पत्नी से चार डब्बें भर बढिया-बढिया स्वादिष्ट पकवान बनाता हैं... और उसे लेकर मंदिर के लिए निकल पड़ता हैं, और रास्तें भर सोचता हैं, आज जो भी हो जाए सोऊगा नही कान्हा को भोग लगाकर रहूंगा..
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 34 • कथा 0DRzmnHGlzOl80sshgjm
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