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पौराणिक कथाएँ 34
पौराणिक कथाएँ 34
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 34 • कथा 5BfcNO33rE1KGDO5Llsr
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दक्षिण में गोदावरी के किनारे कनकावरी नाम की एक नगरी थी। वहीं रामदास रहता था। . जाति का चमार था, परन्तु अत्यन्त सरल हृदय का, सत्य और न्याय की कमाई खाने वाला और प्रभु का निरन्तर चिन्तन करने वाला भक्त था। . रामदास की पतिव्रता स्त्री का नाम मूली था। दम्पत्ती में बड़ा प्रेम था। इनके एक छोटा लड़का था, वह भी माता-पिता का परम भक्त था। . तीनों प्राणियों के पेट भरने पर जो पैसे बचते, उनसे रामदास अतिथि की सेवा और पीड़ितों के दुःख दूर करने का प्रयास करता। . वह समय-समय पर भगवान नाम का संकीर्तन सुनने जाया करता और बड़े प्रेम से स्वयं भी अपने घर कीर्तन करता। . कीर्तन में सुनी हुई यह एक पंक्ति ‘हरि मैं जैसो तैसो बस तेरो। ’ उसे बहुत प्यारी लगी और उसे कण्ठस्थ हो गयी। . वह निरन्तर इसी पंक्ति को गुनगुनाता हुआ सारे काम किया करता। वह सचमुच अपने को भगवान का दास और आश्रित समझकर मन ही मन आनन्द में भरा रहता। . भगवान तो भाव के भूखे होते हैं, वह रामदास के ऐसे प्रेम को देखकर उसे अब अपनाना चाहते थे। . कुछ चोर गहनों के साथ ही कहीं से एक सुन्दर विलक्षण स्वर्णयुक्त शालिग्राम की विशाल मूर्ति चुरा लाये थे, जो उनके लिए सिर्फ एक पत्थर था। . उनमें से एक चोर के जूते टूट गये थे, उसने सोचा इस पत्थर के बदले में जूते की जोड़ी मिल जाए तो अच्छा है। . भगवत् प्रेरणा से शालिग्राम की मूर्ति को लेकर वह सीधा रामदास के घर पहुँचा और मूर्ति उसे दिखाकर कहने लगा... . अरे भाई! देख यह कैसा मजेदार पत्थर है, ज़रा अपने औजार को इस पर घिस तो सही, देख कैसा अच्छा काम देता है, पर इसके बदले में मुझे एक जोड़ी जूते देने पड़ेंगे। . चोर की आव़ाज सुनकर वह चौंका, उसके भजन में भंग पड़ा। उसने समझा कोई ख़रीददार है उसने जूते की एक जोड़ी चोर के सामने रख दी, चोर ने उसे पहनकर दामों की जगह वह मूर्ति रामदास के हाथ पर रख दी। . रामदास अभी तक अर्द्धचेतन अवस्था में था, उसका मन तो बस प्रभु के विग्रह की ओर खिंचा हुआ था इसलिए पैसे लेने की बात याद ही नहीं रही।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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