राम नवमी विशेष - श्रीराम कथा महिमा अध्याय-2 1. पिता की विदाई और पुत्र का संकल्प सुरपुर के निवासी केशव भट्ट भगवान श्रीराम के परम भक्त थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रभु ने उन्हें अपार धन-संपत्ति और ऐश्वर्य प्रदान किया था। एक समय केशव भट्ट ने तीर्थ यात्रा पर जाने का निर्णय लिया। प्रस्थान से पूर्व उन्होंने अपने पुत्र नारायण भट्ट को बुलाया और कहा— "पुत्र, मैं पुण्य क्षेत्रों के दर्शन के लिए जा रहा हूँ। जब तक मैं लौटकर न आऊं, तुम प्रतिदिन और विशेषकर हर शनिवार को श्रीराम की पूजा और उनकी कथा का पठन-श्रवण नियमपूर्वक करना। इसमें कभी भूल न हो। " नारायण ने पिता की आज्ञा शिरोधार्य की। 2. कथा श्रवण में विघ्न और माता की उपेक्षा पिता के जाने के बाद नारायण भट्ट नियम से पूजा करने लगे। एक शनिवार, विधि-विधान से पूजा समाप्त कर उन्होंने अपनी माता से कथा सुनने का आग्रह किया। किंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था। * दोपहर का समय: माता ने काम का बहाना बनाकर कहा कि भोजन के बाद सुनूँगी। * भोजन के उपरांत: माता ने कहा कि पेट भारी है, अभी आराम करना है और फिर घर के अन्य काम (बर्तन, कपड़े, पानी लाना) करने हैं।
कथा प्रसंग 1
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