Skip to main content
Part 1 of 4
Aa
पौराणिक कथाएँ 34
पौराणिक कथाएँ 34
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 34 • कथा wSyTYyx9rT3FcuTSrV0c
1 / 4

रामचरितमानस नामकरण का रहस्य जब गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना की, तब किसी ने उनसे प्रश्न किया— “बाबा! आपने इसका नाम रामायण क्यों नहीं रखा? इसका नाम तो रामायण ही रखा जा सकता था, जैसे वाल्मीकि रामायण या आध्यात्मिक रामायण। फिर रामचरितमानस नाम क्यों? ” तुलसीदास जी ने बड़े सहज भाव से उत्तर दिया— “क्योंकि रामायण और रामचरितमानस में एक बहुत बड़ा अंतर है। ” उन्होंने समझाया— रामायण का अर्थ है राम का मंदिर, राम का घर। मंदिर जाने के लिए कुछ नियम होते हैं— एक निश्चित समय होता है, शुद्ध होकर जाना पड़ता है, हाथ में पुष्प-फल आदि लेकर जाना होता है, और मंदिर में प्रवेश से पहले स्वच्छता आवश्यक होती है। परंतु मानस का अर्थ है सरोवर। सरोवर में कोई शर्त नहीं होती— न समय की पाबंदी, न जाति का भेद, न यह प्रतिबंध कि कौन स्नान कर सकता है और कौन नहीं। जब मनुष्य मैला होता है, अशुद्ध होता है, तभी वह सरोवर में स्नान करने जाता है। जैसे माँ की गोद—जहाँ कभी भी, जैसे भी, वैसे ही बैठा जा सकता है। रामचरितमानस भी ऐसा ही सरोवर है— जहाँ पतित, दुखी, अशांत, अशुद्ध—कोई भी आए,

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 4