श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 1 : Baalkand • अध्याय 36XcUwXPSAVarYOUDAMX
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त्रिशंकु को सदेह स्वर्ग भेजने के बाद महर्षि विश्वामित्र पुष्कर तीर्थ में घोर तपस्या करने लगे। उसी दौरान अयोध्या के राजा अम्बरीष एक महान यज्ञ कर रहे थे, जिसका अश्व देवराज इंद्र ने चुरा लिया। पुरोहितों ने राजा को बताया कि यज्ञ को निर्विघ्न पूर्ण करने के लिए अब अश्व के स्थान पर किसी मनुष्य की आहुति देनी होगी।
