श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 2 : Ayodhyakand • अध्याय 0zwD8kBfnute3cjat1ae
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प्रयाग में जब भरत ने महर्षि भरद्वाज के आश्रम में रात्रि-विश्राम का निश्चय किया, तब महर्षि ने उनकी संपूर्ण सेना को आतिथ्य ग्रहण करने का निमंत्रण दिया। भरत ने संकोचपूर्वक कहा कि हे मुने! आप तो कंद-मूल से हमारा सत्कार कर ही चुके हैं, विशाल सेना का भार आश्रम पर डालना उचित नहीं होगा। किंतु महर्षि भरद्वाज ने मुस्कुराते हुए सेना को भी आश्रम में बुलाने का आग्रह किया।
