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Ramayana Part 2 : Ayodhyakand
Ramayana Part 2 : Ayodhyakand
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 2 : Ayodhyakand • अध्याय 2FX2BvtTE8fUkvO69BqX
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माता कौसल्या ने जब देखा कि श्रीराम अपने पिता की आज्ञा पालन के संकल्प पर अडिग हैं, तो वे अत्यंत व्याकुल हो उठीं। अश्रुओं से भरे नेत्रों के साथ उन्होंने श्रीराम से कहा कि जिसने जीवन में कभी लेशमात्र भी दुख नहीं देखा, वह मेरा सुकुमार पुत्र वन में कंद-मूल खाकर कैसे रहेगा। राजमहल के दास-दासी भी उत्तम अन्न पाते हैं, किंतु तुम बीहड़ वनों में कैसे जीवन व्यतीत करोगे। इस संसार में दैव की गति अत्यंत प्रबल है, जो मेरे धर्मात्मा पुत्र को वन जाने पर विवश कर रही है।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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