श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 2 : Ayodhyakand • अध्याय 82EMCbA0G6fdc3b2fPeP
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लक्ष्मण ने श्रीराम के वनवास में अनन्य सेवक बनकर साथ चलने का अटूट संकल्प व्यक्त किया। श्रीराम के समझाने पर भी लक्ष्मण ने अपनी अविचल भ्रातृभक्ति का प्रमाण दिया।

लक्ष्मण ने श्रीराम के वनवास में अनन्य सेवक बनकर साथ चलने का अटूट संकल्प व्यक्त किया। श्रीराम के समझाने पर भी लक्ष्मण ने अपनी अविचल भ्रातृभक्ति का प्रमाण दिया।