श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 2 : Ayodhyakand • अध्याय Aj8HJX3DcJDQ0IfZesIN
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प्रातःकाल होते ही धर्मात्मा भरत अपने ज्येष्ठ भ्राता श्रीराम को लौटा लाने के पावन संकल्प के साथ उत्तम रथ पर आरूढ़ होकर अयोध्या से प्रस्थान कर गए। उनके आगे-आगे मंत्रियों और पुरोहितों के तेजस्वी रथ चल रहे थे। भरत के पीछे नौ हजार सजे-धजे हाथी, साठ हजार रथ, एक लाख घुड़सवार तथा असंख्य पैदल शूरवीर चल रहे थे। महारानी कौसल्या, सुमित्रा और कैकेयी भी श्रीराम के दर्शन की उत्कंठा लिए रथों पर सवार थीं।
