श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 2 : Ayodhyakand • अध्याय DIZ9wBCMvuAcWkcn9St0
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रात्रि के अंतिम प्रहर में महाराज दशरथ के देहत्याग के उपरांत जब दूसरा प्रभात हुआ, तब प्रतिदिन की भाँति वंदीजन, सूत और मागध राजमहल में उपस्थित हुए। वे वीणा की मधुर झंकार और तालबद्ध करतल-ध्वनि के साथ महाराज के यश और पूर्वजों के पराक्रम का गुणगान करने लगे। पिंजरों में बंद शुक आदि पक्षी चहचहाने लगे और सारा भवन मांगलिक गाथाओं से गूंज उठा।
