कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 14 • कथा 7ATns8SZrLVevgFUjUVc
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एक साधु किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया। पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं तो तीन-चार पनिहारिने पानी के लिए आई तो एक पनिहारिन ने कहा-'आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया। पत्थर का ही सही, लेकिन लगा तो रखा है। ' पनिहारिन की बात साधु ने सुन ली, उसने तुरन्त पत्थर फेंक दिया। दूसरी बोली-'साधु हुआ, लेकिन खीज नहीं गई, अभी रोष नहीं गया, तकिया फेंक दिया।
