कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 14 • कथा 8YKdvspPfuRiX9hxkXA7
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तुलसी और श्री गणेश की यह कथा बहुत ही रोचक है, जो हमें सिखाती है कि कभी-कभी 'क्रोध' और 'श्राप' भी भविष्य में किसी बड़े कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवी तुलसी (जो उस समय एक युवा कन्या के रूप में थीं) गंगा के तट पर टहल रही थीं। वहाँ उन्होंने देखा कि युवा श्री गणेश अत्यंत शांत मुद्रा में ध्यानमग्न बैठे थे। गणेश जी का पीतांबर, चंदन का लेप और उनका दिव्य तेज देखकर तुलसी उन पर मोहित हो गईं। तुलसी ने गणेश जी का ध्यान भंग किया और उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा।
