कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 14 • कथा USjXmBHWTTSn1gbP1yuI
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श्री राम के वनवास से लौटने के बाद कैकई श्री राम के पास गयी तथा अपने अपराध की क्षमा मांगने लगी। कैकयी ने श्री राम से कहा कि मैंने तुम्हे वनवास भेज कर बहुत बड़ा अपराध किया था। मुझे क्षमा कर दो। तुम कृपालु हो, मुझे अपनी शरण में लो। मुझे कोई मार्ग दिखायो जिस से मेरा अज्ञान नष्ट हो तथा मेरा उद्धार हो जाए। यह सुनकर श्री राम बोले कि माता, आपने कोई अपराध नही किया है। उस समय देवी सरस्वती ने आपकी वाणी में बैठकर वह वर मंगवाया था। आपको लेकर मेरे मन में कोई नाराजगी नही है।
