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पौराणिक कथाएँ 14
पौराणिक कथाएँ 14
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 14 • कथा uLwbR0A799uL6L4unVsm
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एक बुढ़िया के के सात बेटे थे। छः बेटे कमाते थे और सातवां बेटा नहीं कमाता था। बूढ़ी माँ कमाने वाले बेटों के लिए भोजन बनाकर उन्हें खिलाती और बची हुई झूठन सातवें बेटे को दे दिया करती थी। बेटे को यह पता नहीं था। उसकी पत्नी ने उसे यह बात बताई। उसे विश्वास नहीं हुआ। छुपकर देखा तो उसे पता चला की यह सच था। उसे बड़ा दुःख हुआ। माँ के खाना खाने बुलाने पर वह बोला – मैं यह खाना नहीं खाऊंगा। परदेस जाकर कमाई करूँगा। माँ बोली – कल जाता हो तो आज ही चला जा। यह सुनकर वह तुरंत घर से निकल गया। रास्ते में पत्नी से मिला। वह गोबर से कंडे बना रही थी। बोला – मैं परदेस जा रहा हूँ कुछ समय बाद लौटूंगा। तुम अपना धर्म का पालन करते हुए ध्यान से रहना। वह बोली आप मेरी चिंता ना करें। मुझे भूलना मत और मुझे अपनी कुछ निशानी दे दो। उसे देखकर मैं समय बिता लूँगी। उसने उसे अपनी अंगूठी दे दी और चल पड़ा। एक बड़े शहर में बड़ी दुकान देखकर उसने काम माँगा। वहां जरुरत थी इसलिए सेठ ने उसे काम पर रख लिया। उसने दिन रात मेहनत की। सेठ उसे तरक्की देता गया। कुछ ही समय में अपनी मेहनत और लगन से उसने सेठ का विश्वास इतना जीत लिया की सेठ ने उसे अपना पार्टनर बना लिया। कुछ समय बाद सारा काम उसे सौंप कर सेठ यात्रा पर निकल गया। अब वह खुद बड़ा सेठ बन चुका था। उधर उसकी पत्नी पर बड़े जुल्म हो रहे थे। घर के सभी लोग उससे दिन भर काम करवाते। जंगल में लकड़ी लाने भेजते। भूसे की रोटी खाने को देते। नारियल के कटोरे में पानी पिलाते। एक दिन जंगल जाते समय उसने रास्ते में कुछ औरतों को संतोषी माता का व्रत करते देखा। कथा कहते हुए सुना। उसने पूछा की यह व्रत कैसे करते है , और इसे करने से क्या होता है।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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