भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएँ अत्यंत अद्भुत और रहस्यमयी हैं। वे जितने करुणामय हैं, उतने ही नटखट भी। वे अपने भक्तों की रक्षा तो करते ही हैं, साथ ही कभी-कभी उनसे बालसुलभ खेल भी करते हैं। किंतु भगवान की हर लीला में भक्तों के लिए कोई न कोई कल्याणकारी संदेश और लाभ अवश्य छिपा होता है। ऐसी ही एक मनोरम कथा भगवान के जगन्नाथ स्वरूप से संबंधित है। जगन्नाथपुरी के सिंहद्वार के समीप उनके परम भक्त रघुदास निवास करते थे। वे वहाँ के राजा के गुरु भी थे। रघुदास जी की भक्ति इतनी निष्कलंक थी कि भगवान स्वयं बालक के रूप में उनके पास आकर उनसे मिलते और उनसे सखा-भाव से बातचीत करते थे। यह बात वहाँ के कई लोग जानते भी थे। एक दिन भगवान जगन्नाथ बालक रूप में रघुदास जी के पास आए और हँसते हुए बोले— “राजा के पास इतना बड़ा कटहलों का बगीचा है, पर कभी मुझे कटहल का भोग नहीं लगाया जाता।
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 20 • कथा 8sQ32juglRVnM3kPS9cp
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