कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 20 • कथा JyyrwHAIeTUs2vA0LZdd
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एक सन्त थे वे भगवान राम को बहुत मानते थे कहते है, यदि भगवान से निकट आना है तो उनसे कोई रिश्ता जोड़ लो,जहाँ जीवन मे कमी है वही ठाकुर जी को बैठा दो, वे जरुर उस सम्बन्ध को निभायेगे… इसी तरह सन्त भी भगवान राम को अपना शिष्य मानते थे,और शिष्य पुत्र के समान होता है, इसलिए माता सीता को पुत्र वधु (बहू) के रूप मे देखते थे, उनका नियम था रोज मन्दिर जाते और अपनी पहनी माला भगवान को पहनाते थे, उनकी यह बात मन्दिर के लोगो को अच्छी नही लगती थी . लोगों ने पुजारी से कहा; ये बाबा रोज मन्दिर आते है,और भगवान को अपनी उतारी हुई माला पहनाते है, कोई तो बाजार से खरीदकर भगवान को पहनाता है, और ये अपनी पहनी हुई भगवान को पहनाते है,
