एक बार की बात है गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ एक गाँव से दूर किसी बड़े नगर की तरफ जा रहे थे | गर्मी के दिन थे और रास्ता भी बहुत लंबा था | गौतम बुद्ध अपने शिष्यों सहित बहुत देर से चल रहे थे जिस वजह से उन्हे बहुत प्यास लगती है | वहाँ से कुछ ही दूरी पर बरगद के वृक्ष की एक घनी छाँव थी सभी लोग उस वृक्ष के पास पहुँच जाते है महात्मा बुद्ध अपने शिष्यों सहित वृक्ष की घनी छाया के नीचे विश्राम करने लगते है | बहुत देर से चलने की वजह से सभी का गला प्यास से सूख रहा था | यह बात बुद्ध जानते थे बुद्ध ने अपने एक शिष्य को कहा , आप इस बरगद की छाया से 20 कदम दूर जाकर बरगद की 2 बार परिक्रमा करके वापिस आओ | शिष्य वैसा ही करता है जैसा बुद्ध ने बताया | परिक्रमा के बाद जब शिष्य महात्मा बुद्ध के पास आया तो बुद्ध बोले की क्या आपको किसी ठंडी हवा का अनुभव हुआ था | शिष्य बोला हाँ महात्मा बुद्ध उस उत्तर दिशा की तरफ से मुझे कुछ ठंडी हवा की अनुभव हुआ था | शिष्य की यह बात सुन महात्मा बुद्ध शिष्य से तुरंत बोले की उसी दिशा मे चले जाओ ज़रूर वहाँ से कुछ ही दूर पर एक तालाब अवश्य मिलेगा | उस तालाब से सब के लिए पानी ले आओ | शिष्य उसी दिशा मे जब कुछ दूर जाता है तो वहाँ सच मे एक तालाब होता है | तालाब देख शिष्य बहुत प्रसन्न होता है और तालाब के निकट जाकर जैसे ही तालाब से पानी भरने वाला होता है तभी शिष्य की नज़र वहाँ दूर तालाब मे कपड़े धो रही कुछ स्त्रियो पर जाती है |
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 42 • कथा D7SpyhyLmBhxJH8UWigy
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