कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 46 • कथा H5CesiVtvR2w6ARoOoYE
1 / 4
स्वामी विवेकानंद का 'नरेंद्र' से 'विवेकानंद' बनने का सफर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस के बिना अधूरा है। यह कहानी एक तार्किक और संशयवादी युवक के पूर्ण समर्पण की अद्भुत गाथा है। पहली मुलाकात: "क्या आपने ईश्वर को देखा है? " नरेंद्र (विवेकानंद) बचपन से ही बहुत जिज्ञासु थे। वे उस समय के हर बड़े विद्वान के पास जाकर एक ही सवाल पूछते थे— "क्या आपने भगवान को देखा है? " सब गोल-मोल जवाब देते, जिससे नरेंद्र संतुष्ट नहीं होते थे। अंत में, 1881 में वे दक्षिणेश्वर मंदिर के पुजारी रामकृष्ण परमहंस से मिले। नरेंद्र ने वही सीधा सवाल दागा: "महाराज, क्या आपने ईश्वर को देखा है? " रामकृष्ण ने बिना पलक झपकाए मुस्कुराते हुए जवाब दिया:
