कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 46 • कथा pQ63l48Zs3DuBTECG0Pg
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बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में दो बहनें रहती थीं—सुमति और कुमति। दोनों स्वभाव में एक-दूसरे से बिलकुल अलग थीं। सुमति दूरदर्शी थी और हमेशा भविष्य की सुख-सुविधाओं के सपने देखती थी, जबकि कुमति थोड़ी चंचल थी और वर्तमान के छोटे-छोटे क्षणों का आनंद लेना जानती थी। एक दोपहरी, दोनों बहनें गाँव की साँझी चक्की पर गेहूँ पीसने गईं। चक्की चलती रही—घर्र-घर्र, घर्र-घर्र। पत्थर के दो पाटों के बीच गेहूँ के सुनहरे दाने पिसकर सफेद आटे में बदल रहे थे। काम करते-करते कुमति को भूख लगी। उसने मुट्ठी भर साबुत गेहूँ उठाए और चबाने लगी। सुमति ने उसे टोका, "री पगली! यह क्या कर रही है? कच्चे दाने क्यों चबा रही है? देख, अभी थोड़ा धैर्य रख। सारा आटा पीस जाए, फिर घर चलेंगे। वहाँ बढ़िया घी में चोपड़कर, गुड़ मिलाकर चूरी बनाएंगे और आराम से बैठकर खाएंगे।
