कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 47 • कथा IBBaxOJPgGArBRZ66FYX
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यह एक अत्यंत प्रेरणादायक और प्रसिद्ध संस्मरण है, जो स्वामी विवेकानंद के जीवन के 'अहंकार के विसर्जन' और 'समदृष्टि' के बोध को दर्शाता है। स्वामी विवेकानंद और नर्तकी: आत्मबोध की कहानी यह घटना 1891 की है, जब स्वामी विवेकानंद अपने देशव्यापी भ्रमण के दौरान खेतड़ी (राजस्थान) के महाराजा अजीत सिंह के अतिथि बने थे। (अक्सर इसे जयपुर के प्रसंग में भी सुना जाता है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह खेतड़ी की घटना है)। 1. अनपेक्षित स्वागत महाराजा ने स्वामी जी के सम्मान में एक भव्य दरबार का आयोजन किया और उस समय की प्रसिद्ध नर्तकी (मैना बाई) को गायन के लिए आमंत्रित किया। स्वामी जी, जो उस समय एक युवा संन्यासी थे और कंचन-कामिनी के मोह से दूर रहने के लिए कठोर अनुशासन का पालन कर रहे थे, इस बात से क्षुब्ध हो गए।
