कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 47 • कथा XBenHmvDM5IN2ry90DaU
1 / 4
गजलक्ष्मी का स्वरूप सौभाग्य, समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इनकी कथा मुख्य रूप से समुद्र मंथन और महाभारत के प्रसंगों से जुड़ी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ, तो उसमें से 14 रत्न निकले थे। इन्हीं रत्नों में से एक देवी लक्ष्मी थीं। जब देवी लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुईं, तो वे दिव्य कमल के पुष्प पर विराजमान थीं। उनके वैभव और सौंदर्य को देखकर देव और दानव दोनों मंत्रमुग्ध हो गए। उसी समय, दिग्गज (दिशाओं के हाथी) वहां आए और उन्होंने स्वर्ण कलशों में पवित्र नदियों का जल लेकर देवी लक्ष्मी का जलाभिषेक किया। हाथियों द्वारा लक्ष्मी जी के इस अभिषेक वाले रूप को ही 'गजलक्ष्मी' कहा गया।
