कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 47 • कथा eN8YIJiJJoN97c8jObdK
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हनुमान जी का नाम सुनते ही भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों के कांपने के पीछे गहरे पौराणिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं। "भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे" - यह सिर्फ एक पंक्ति नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों का अटूट विश्वास है। हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार माने जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, शिव ही 'भूतनाथ' (भूतों के स्वामी) हैं। चूँकि हनुमान जी शिव का ही स्वरूप हैं, इसलिए सभी तामसिक शक्तियाँ, भूत, प्रेत और पिशाच उनके अधीन माने जाते हैं। जब कोई हनुमान जी का नाम लेता है, तो वह सीधे उस परम शक्ति को पुकारता है जिससे ये बुरी शक्तियाँ थर-थर कांपती हैं।
