Skip to main content
Part 1 of 4
Aa
पौराणिक कथाएँ 47
पौराणिक कथाएँ 47
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 47 • कथा fLTlBn9GGRc65zd74sp1
1 / 4

एक बार एक भक्त हर रोज़ मंदिर आता । श्रद्धा भाव से मंदिर में काम करता। उसे साक्षात प्रभु के दर्शन होते थे। एक दिन कहने लगा कि," प्रभु आप दिन- रात यहां खड़े रहते हैं ऐसा करें कि आप घूम- फिर आए मैं आप के स्थान पर जहां खड़ा हो जाता हूं"। भक्त के बार - बार आग्रह करने पर भगवान बोले चलो ठीक है लेकिन तुम चुपचाप यहां खड़े रहना। कोई भी भक्त आ कर कुछ भी विनती करें, पुकार करे , तुम कुछ भी सही- ग़लत होते देखो लेकिन फिर भी तुम चुप रहना। मैंने मंदिर में आने वाले हर भक्त के लिए उचित प्रबंध पहले से ही किया हुआ है। भगवान भक्त के आग्रह पर भक्त को वहां खड़े कर स्वयं चले गए। कुछ समय के पश्चात एक धनवान सेठ मंदिर में आया और कहने लगा कि प्रभु इस बार भी मुझे धंधे में फायदा हो ऐसी कृपा कर देना। ईश्वर से फरियाद कर वह जैसे ही जाने लगा उसका पैसों से भरा पर्स मंदिर में गिर गया। भगवान के स्थान पर खड़े भक्त के मन में विचार आया कि इसे रोककर बता दूं कि तुम्हारा पर्स गिर गया है लेकिन उसे भगवान की बात का स्मरण हो आया कि तुम जो हो रहा है केवल देखोगे ,बोलोगे कुछ नहीं।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 4