कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 47 • कथा w1TZfQ9Tn5t1ZBLsHRka
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श्रीमद्भागवत महात्म्य में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की यह कथा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह बताती है कि कलियुग में केवल किताबी ज्ञान काम नहीं आता, बल्कि हृदय की भक्ति ही जीवन को पुनर्जीवित करती है। यहाँ देवी भक्ति और उनके दो पुत्रों ज्ञान और वैराग्य की प्रेरणादायक कथा है: एक बार देवर्षि नारद पृथ्वी पर आए। उन्होंने देखा कि चारों ओर अशांति और अधर्म है। घूमते-घूमते वे वृंदावन पहुंचे, जहाँ उन्होंने एक आश्चर्यजनक दृश्य देखा: एक सुंदर युवती (भक्ति) रो रही थी। उसके पास दो वृद्ध पुरुष (बूढ़े व्यक्ति) अचेत अवस्था में पड़े थे और कुछ स्त्रियाँ उन्हें पंखा झल रही थीं। नारद जी ने पूछा, "देवि! आप कौन हैं और ये वृद्ध पुरुष कौन हैं?
