कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 16 • कथा MLoInAyNKIf7OjuYsAmr
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"जब 40 साल के तपस्वी को एक पुजारी ने जीवन का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाया। ” रामकृष्ण परमहंस और तोतापूरी के बीच का संवाद केवल गुरु-शिष्य की चर्चा नहीं थी, बल्कि यह ज्ञान और विज्ञान का मिलन था। तोतापूरी जहाँ शुष्क वेदांत के पक्षधर थे, वहीं रामकृष्ण भाव-भक्ति के सागर थे। इनके बीच हुए कुछ प्रमुख संवाद और तर्क-वितर्क 1. "आग और उसकी गर्मी" जब तोतापूरी ने पहली बार रामकृष्ण को माँ काली की मूर्ति के सामने रोते और बात करते देखा, तो उन्होंने इसे 'भ्रम' बताया। तोतापूरी: "तुम इस मिट्टी की प्रतिमा में क्यों उलझे हो? ब्रह्म तो निराकार है, वह निर्गुण है। " रामकृष्ण: "महाराज, क्या आप आग को उसकी गर्मी से अलग कर सकते हैं? क्या आप दूध को उसकी सफेदी से अलग कर सकते हैं?
