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पौराणिक कथाएँ 16
पौराणिक कथाएँ 16
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 16 • कथा etYT2R3QRxHRF8HnVfvB
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पद्मपुराण में पतिव्रता देवी कौशिकी की कथा का वर्णन विस्तार से किया गया है. देवी कौशिकी एक ऐसी नारी थीं जिनके प्रताप के आगे देवताओं को भी झुकना पड़ा. उनके श्राप से सूर्य की गति रुक गई. जिस सूर्य के आगे किसी भी देवी-देवता का तेज फीका पड़ जाए, उस सूर्य का तेज एक स्त्री के सामने मंद पड़ गया. उन्होंने कोढ़ से ग्रसित अपने पति की सेवा में पूरा जीवन व्यतीत कर दिया और सदैव उनकी आज्ञा का पालन किया. लेकिन जब देवी कौशिकी के पति को मांडव ऋषि का श्राप लगा तो उन्होंने यमराज को भी धर्मसंकट में डाल दिया और सूर्य देवता को उदय होने से रोक दिया था. आइए जानते हैं देवी कौशिकी की इस कथा के बारे में. जब कौशिकी को ऋषि ने दिया श्राप प्रचलित कथा के अनुसार प्रतिष्ठानपुर नगर में कौशिक नाम का एक ब्राह्मण रहता था, जो कोढ़ से पीड़ित था. कौशिक के सभी रिश्तेदार उसे छोड़कर चले गए. लेकिन उनकी पत्नी कौशिकी जीवन भर उनकी सेवा में लगी रही. एक रात कौशिकी अपने पति को कंधे पर उठाकर कहीं जा रही थी. रास्ते में मांडव ऋषि अपने शूल पर बैठकर तपस्या कर रहे थे. ऐसे में अंधेरे की वजह से कौशिकी मांडव ऋषि को देख नहीं पाई, जिसकी वजह से कौशिक का पैर ऋषि के शूल से टकरा गया. अगर आपको कथा संग्रह की पोस्ट पसंद आती है तो आज ही सब्सक्राइब करें कथा संग्रह कौशिकी ने ऋषि से हाथ जोड़कर क्षमा मांगी और कहा ऋषि देव हमसे भूल हो गई कृपया हमें माफ करें. लेकिन तपस्या भंग होने की वजह से ऋषि मांडव को क्रोध आया और उन्होंने कौशिकी को श्राप दिया कि सूर्योदय होते ही वह विधवा हो जाएगी.

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