Skip to main content
Part 1 of 4
Aa
पौराणिक कथाएँ 16
पौराणिक कथाएँ 16
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 16 • कथा iUhouiBWIdi62xcESRRX
1 / 4

काशी के एक छोटे से गाँव में एक वृद्धा रहती थी जिसका नाम था, गोमती माँ। उसके पास रहने को एक टूटी झोपड़ी और भगवान कृष्ण की एक छोटी सी पत्थर की मूर्ति थी। गोमती माँ बहुत गरीब थी, लेकिन उसका नियम अटूट था—वह हर दोपहर भगवान को 'मालपुआ' का भोग लगाती थी। ​पर हकीकत यह थी कि उसके पास न घी था, न शक्कर, और न ही आटा। ​भाव की रसोई ​गोमती माँ रोज़ दोपहर को चूल्हा जलाती, उस पर एक खाली मिट्टी की कड़ाई रखती और अपनी आँखें बंद कर लेती। वह कल्पना में भगवान के लिए मालपुए तलती। वह बड़े प्रेम से कहती: ​"प्रभु, देखो घी गर्म हो गया है, अब मैं इसमें घोल डाल रही हूँ... देखो कान्हा, मालपुआ कितना सुनहरा और कुरकुरा बना है!

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 4