कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 16 • कथा pkHOjEK3xOrlyvIZ6DT8
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श्री अयोध्या जी में एक उच्च कोटि के संत रहते थे, इन्हें रामायण का श्रवण करने का व्यसन था, जहां भी कथा चलती वहाँ बड़े प्रेम से कथा सुनते, कभी किसी प्रेमी अथवा संत से कथा कहने की विनती करते। एक दिन राम कथा सुनाने वाला कोई मिला नहीं, वहीं पास से एक पंडित जी रामायण की पोथी लेकर जा रहे थे, पंडित जी ने संत को प्रणाम् किया और पूछा की महाराज ! क्या सेवा करे ? संत ने कहा - पंडित जी, रामायण की कथा सुना दो परंतु हमारे पास दक्षिणा देने के लिए रुपया नहीं है, हम तो फक्कड़ साधु है, माला, लंगोटी और कमंडल के अलावा कुछ है नहीं और कथा भी एकांत में सुनने का मन है हमारा। अगर आपको कथा संग्रह की पोस्ट पसंद आती है तो आज ही सब्सक्राइब करें कथा संग्रह पंडित जी ने कहा ठीक हैं महाराज , संत और पंडित जी सरयू के किनारे कुंजों में जा बैठे ।
