कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 44 • कथा 0zTPL5bQzRZXK0BHIIRp
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यह भक्त प्रह्लाद के जीवन की वह प्रेरक कथा है जिसने एक राजकुमार को 'भक्त शिरोमणि' बना दिया। प्राचीन काल की बात है, असुर राज हिरण्यकशिपु का आतंक चारों ओर फैला था। उसने घोषणा कर रखी थी कि कोई भी विष्णु का नाम नहीं लेगा, केवल उसकी पूजा की जाएगी। उसी काल में उसके महल के समीप एक वृद्धा कुम्हारिन रहती थी। एक दिन कुम्हारिन ने मिट्टी के बहुत से बर्तन बनाए। अनजाने में एक बिल्ली ने अपने दो नन्हे बच्चों को एक बड़े से कच्चे घड़े में छिपा दिया। कुम्हारिन इस बात से अनजान थी। उसने उस घड़े सहित सभी बर्तनों को 'आवे' (मिट्टी पकाने वाली भट्टी) में व्यवस्थित कर दिया और नीचे से आग लगा दी। जैसे ही आग की लपटें तेज हुईं, उसे अचानक बिल्ली के बच्चों की याद आई। कुम्हारिन का हृदय कांप उठा। वह जानती थी कि अब आग बुझाना असंभव है और घड़ा भट्टी के बिल्कुल बीच में था।
