कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 44 • कथा dzsr38vKjNWoYcERXnsf
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कुंभनदासजी अष्टछाप के सबसे पहले कवि थे। वे खेती-बाड़ी करते थे और श्रीनाथजी के अनन्य भक्त थे। वे इतने सरल थे कि उन्हें सांसारिक वैभव और मान-सम्मान से रत्ती भर भी मोह नहीं था। जब शहंशाह अकबर ने बुलाया उनकी प्रसिद्धि सुनकर मुगल सम्राट अकबर ने उन्हें फतेहपुर सीकरी आने का निमंत्रण भेजा। कुंभनदासजी जाना नहीं चाहते थे, क्योंकि उनके लिए श्रीनाथजी का दर्शन ही सर्वोपरि था।
