माँ दुर्गा के नौ रूपों की कथाएं अत्यंत प्रेरणादायी और विस्तृत हैं। प्रत्येक देवी की विस्तारपूर्वक पौराणिक कथा : 1. माँ शैलपुत्री: हिमालय की पुत्री सती के आत्मदाह के बाद, उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। विस्तृत कथा: अपने पूर्व जन्म में माता 'सती' ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने पति भगवान शिव का अपमान सहने के बाद योगाग्नि में भस्म कर लिया था। अगले जन्म में वे शैलराज हिमालय की पुत्री बनीं। पर्वत (शैल) की पुत्री होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। महत्व: ये वृषभ (बैल) पर सवार हैं और इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल है। इनकी पूजा से व्यक्ति को स्थिरता और अडिगता प्राप्त होती है। 2. माँ ब्रह्मचारिणी: तपस्या की प्रतिमूर्ति ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। विस्तृत कथा: नारद जी के उपदेश पर माता ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हज़ारों वर्षों तक केवल फल-फूल खाकर और फिर केवल पत्ते (बेलपत्र) खाकर कठिन तपस्या की। अंत में उन्होंने पत्तों को भी खाना छोड़ दिया, जिससे उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। उनकी इस कठोर तपस्या से उनका शरीर क्षीण हो गया था, लेकिन उनकी भक्ति देख स्वयं ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान दिया कि उन्हें शिवजी ही पति रूप में प्राप्त होंगे।
कथा प्रसंग 1
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