कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 12 • कथा 65p0AspmBKcVpyqyqzEq
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भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को बहुत सारी सम्पत्ति दी और सुदामा अब और अधिक भक्ति करने लगे। वे अब हर समय परमात्मा के ध्यान में ही निमग्न रहता। एक दिन सुदामा ने मन में सोचा, हर तरफ माया की बातें हो रही हैं पर माया मुझे क्यों नहीं दिखायी देती है। यह माया पता नहीं कैसी होगी ? उन्होंने भगवान् श्रीकृष्ण से कहा—‘मुझे अपनी माया दिखाइए। भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा, तुम मुझे भूल जाओ तो तुम्हें माया दिखाई देगी। ईश्वर ज्ञान और माया अज्ञान का प्रतीक है। जो परमात्मा के ध्यान में तल्लीन रहता है, उसे माया कैसे दिखाई देगी ? भगवान् श्रीकृष्ण ने सुदामा को अपने मायाजाल में मोहित करने की ठानी। श्रीकृष्ण और सुदामा गोमती नदी में स्नान करने गए। संध्योपासना का समय हो रहा था इसलिए जल्दी-जल्दी स्नान करने में सुदामा श्रीकृष्ण को भूल गए।
