एक भिखारी रोज एक दरवाजे पर जाता और भीख के लिए आवाज लगाता, और जब घर मालिक बाहर आता तो उसे गंदी - गंदी गालिया और ताने देता, मर जाओ, काम क्यों नहीं करतें, जीवन भर भीख माँगतें रहोगे! ! कभी-कभी गुस्सें में उसे धकेल भी देता, पर भिखारी बस इतना ही कहता, ईश्वर तुम्हारें पापों को क्षमा करें! एक दिन सेठ बड़े गुस्सें में था। शायद व्यापार में घाटा हुआ था। वो भिखारी उसी वक्त भीख मांगने आ गया, सेठ ने आव देखा ना ताव, सीधा उसे पत्थर दे मारा। भिखारी के सिर से खून बहने लगा, फिर भी उसने सेठ से कहा - ईश्वर तुम्हारे पापों को क्षमा करें, और वहाँ से जाने लगा। सेठ का थोड़ा गुस्सा कम हुआ, तो वह सोचने लगा - मैंने उसे पत्थर से भी मारा, पर उसने बस दुआ दी! इसके पीछे क्या रहस्य है, जानना पड़ेगा। और वह भिखारी के पीछे चलने लगा। भिखारी जहाँ भी जाता, सेठ उसके पीछे जाता। कहीं कोई उस भिखारी को कोई भीख दे देता तो कोई उसे मारता, जलील करता, गालियाँ देता।
कथा प्रसंग 1
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