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पौराणिक कथाएँ 12
पौराणिक कथाएँ 12
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 12 • कथा MmI6x4qF66O4jzcueKmf
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सतयुग की बात है. एक समय में भद्राश्व नामक महान राजा हुआ करते थे. भद्राश्व इतने शक्तिशाली राजा थे कि उनके नाम पर भद्राश्ववर्ष पड़ा. एक बार उनके राज्य में अगस्त्य मुनि पहुंचे. वे राजमहल में भी पधारे. राजा ने खूब आवभगत की. अगस्त्य बोले- भद्राश्व मैं तुम्हारे वहां सात दिन रुकूंगा. राजा ने उनके ठहरने का विधिवत प्रबंध किया और अपने सेवकों इत्यादि को उनकी सेवा में लगा दिया. उन्होंने अपनी रानियों से उनके दर्शन लाभ लेने को कहा. राजा भद्राश्व की रानी कांतिमती अत्यंत सुंदरी थी. कहते हैं उसके चेहरे की चमक बारह सूर्यों के समान चौंधिया देने वाली थी. रानी कांतिमति के अलावा राजा के रनिवास में पचास हजार अन्य रानियां भी थी पर कांतिमती की कोई बराबरी नहीं थी. पहले ही दिन रानी कांतिमती मुनि अगस्त्य के दर्शन के लिये आयी. अगस्त्य मुनि ने कांतिमति को देखा तो देखते रह गये. उन्होंने कहा.. राजा तू बड़ा ही भाग्यवान है, तू धन्य है. दूसरे दिन कांतिमती फिर आयी तो उसे देखकर अगस्त्य बोले.. ओह, सारा संसार वंचित रह गया. तीसरे दिन कहा.. ये लोग तो उस गोविंद की माया को भी नहीं जानते जिसने एक दिन की प्रसन्नता में इन्हें क्या कुछ नहीं दे दिया.

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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