कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 5 • कथा 5NvtENxn64mExZVWCKyE
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वृन्दावन की संकरी गलियों में माधव की मिठाई की दुकान थी। उसकी दुकान पर बांके बिहारी जी का एक छोटा सा चित्र हमेशा मुस्कुराता रहता था, और माधव अपनी हर मिठाई का पहला टुकड़ा उसी चित्र को अर्पित करता। माधव कोई बड़ा व्यापारी नहीं था, बस एक साधारण हलवाई था जिसकी कमाई उसके पेट और बिहारीजी की सेवा के लिए काफी थी। पर उसके हाथों में एक जादू था, क्योंकि वह हर मिठाई को अपने लाला (बांके बिहारी) के लिए प्यार और भक्ति से बनाता था। एक दिन, पूरे शहर में यह खबर फैली कि बिहारीजी की सवारी निकलने वाली है। माधव का मन उमंग से भर गया। उसने सोचा कि आज वह अपने लाला के लिए कुछ खास बनाएगा। उसने बड़ी मेहनत और लगन से एक बड़ा सा 'घेवर' (राजस्थानी मिठाई) बनाया, उसे केसर, बादाम और चांदी के वर्क से सजाया।
