कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 5 • कथा v3sYpno95cbry0blIhCi
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महान भक्त नरसी मेहता जब राग केदार गाते थे तो कुछ न कुछ अजीब होता था , कभी ठाकुर जी की माला टूट के गिर जाती , कभी उनकी बंसी हिल जाती , कभी मुकुट टेढ़ा हो जाता , देखने वाले और सुनने वाले एकदम आश्चर्य में पड़ जाते। नरसी मेहता ने एक सेठ से कर्ज लिया हुआ था जो वो चुकाने में असमर्थ थे , उनके पास ऐसी कोई चीज़ भी नहीं थी जो वो धन के बदले दे सकें , सेठ के मुंशी ने नरसी मेहता के केदार राग की खूब चर्चा सुनी थी , वो मुंशी अपने सेठ से बोला आप इससे कोरे कागज़ पर ये लिखवा लो कि जब तक ये क़र्ज़ न चुका दे राग केदार नहीं गायेगा , सेठ जी ने ऐसा ही किया। अब नरसी मेहता का राग केदार सेठ के यहाँ गिरवी हो गया।
