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पौराणिक कथाएँ 36
पौराणिक कथाएँ 36
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 36 • कथा FznpBfWqpaP8T3btPwb6
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अक्षय तृतीया, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में सबसे शुभ और 'अबूझ' मुहूर्तों में से एक है। 'अक्षय' का अर्थ है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो। अक्षय तृतीया से कई महत्वपूर्ण घटनाएँ जुड़ी हैं, जो इसे विशेष बनाती हैं: 1. युधिष्ठिर और अक्षय पात्र वनवास के दौरान जब पांडवों के पास भोजन की कमी हुई, तब भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को 'अक्षय पात्र' प्रदान किया था। इस पात्र की विशेषता यह थी कि इसमें से भोजन कभी समाप्त नहीं होता था। यह घटना इसी दिन हुई थी, जो यह दर्शाती है कि इस दिन किया गया दान और पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। 2. सुदामा और श्रीकृष्ण का मिलन गरीब ब्राह्मण सुदामा जब अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुँचे थे, तो उनके पास भेंट में देने के लिए केवल दो मुट्ठी चावल थे।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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