Skip to main content
Part 1 of 4
Aa
पौराणिक कथाएँ 36
पौराणिक कथाएँ 36
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 36 • कथा ZM5oJtFxio6znBGJuwFb
1 / 4

जब-जब मर्यादा, भक्ति और आदर्श पुरुषोत्तम श्रीराम का स्मरण होता है, तब उनके अनन्य भक्त गोस्वामी तुलसीदास जी का नाम श्रद्धा से स्वयं प्रकट हो जाता है। पर तुलसीदास जी को हम प्रायः एक सिद्ध महापुरुष के रूप में देखते हैं, यह भूल जाते हैं कि संत बनने से पहले वे भी एक साधारण मनुष्य थे — कमज़ोरियों वाले, प्रेम में डूबे हुए, और मोह की जंजीरों में बँधे हुए। उनका बचपन नाम था — रामबोला। जीवन ने उन्हें बहुत जल्दी अकेला कर दिया। माता-पिता का साया उठ गया, और बालमन ने सुरक्षा, अपनापन और स्थिरता को बहुत पहले खो दिया। ऐसे मनुष्य के जीवन में जब प्रेम आता है, तो वह केवल संबंध नहीं रहता — वह सहारा बन जाता है, वह संसार बन जाता है। विवाह हुआ। पत्नी सुशील थीं, समझदार थीं। पर रामबोला का प्रेम धीरे-धीरे आसक्ति में बदल गया। पत्नी के बिना जीवन सूना लगता था,

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 4