कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 36 • कथा bgvh1an5JpXZtwBYJh7d
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प्राचीन भारत के हृदय में कालपुर नाम का एक वैभवशाली राज्य हुआ करता था। वहाँ के ऊँचे मंदिर और समृद्ध बाज़ार दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। लेकिन सत्ता के मद में चूर वहाँ के राजा 'विक्रम सिंह' ने एक दिन मर्यादा की सीमा लाँघ दी। उन्होंने अपने दरबार में आए एक सिद्ध तपस्वी का उपहास उड़ाया और उन्हें अपमानित कर राज्य से बाहर निकाल दिया। जाते-जाते उस साधु की आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उन्होंने केवल इतना कहा: "जहाँ विद्वानों का अपमान और अहंकार का वास होता है, वहाँ लक्ष्मी नहीं, अलक्ष्मी और अंधकार का वास होता है। कालपुर, अब तेरा समय (काल) निकट है। " साधु के जाते ही कालपुर की किस्मत बदल गई। दोपहर के समय भी सूर्य का प्रकाश धुंधला लगने लगा।
