कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 36 • कथा ezDfzVvUQJxnrj0lgK6b
1 / 4
सफलता का बोझ मलूक दास जी के जीवन की यह कहानी उनके 'आत्मज्ञान' और 'अहंकार के त्याग' पर आधारित है। पहली कहानियों में आपने देखा कि कैसे भगवान ने उन्हें खिलाया और उनका कर्ज चुकाया, लेकिन यह कहानी बताती है कि ईश्वर से मिलने का असली रास्ता क्या है। मलूक दास और 'अहंकार' की गठरी एक बार मलूक दास जी के मन में यह विचार आया कि अब तो वे बहुत बड़े संत हो गए हैं, साक्षात भगवान उनके लिए काम करने आते हैं। धीरे-धीरे उनके मन में सूक्ष्म रूप से 'अहंकार' घर करने लगा था। उसी समय, उनके पास एक साधारण सा गरीब किसान आया। उसने कहा, "महाराज, मैंने सुना है आप बहुत बड़े सिद्ध पुरुष हैं।
